Friday, 20 December 2013

क्रांतिकारी संपादक

मुफलिसी में जन्मा क्रांतिकारी


बचपन तो वही होता है जो कंचे और अंटियों को जेबों में भरकर सो जाए, बचपन यानी जो पतंगों को बस्ते में छुपाकर लाए, बचपन मतलब जो मिट्टी को सानकर लड्डू बनाए। बचपन का तो मतलब ही यही होता है जो बड़ों की हर चीज को छुपकर आजमाए। ऐसा बचपन तो कुछ को ही मिलता है। इस सपनीले बचपन से इतर बचपन गुजरा अमृतसर की सरजमीं पर पैदा हुए महान क्रांतिकारी और संपादक सोहन सिंह का।


गुरबत भरा बचपन

सोहन सिंह बचपन से ही क्रांतिकारी स्वाभाव के थ्ो। उनमें देशभक्ति और जीवटता कूट-कूट कर भरी हुई थी। सोहन का जन्म 187० ई. में अमृतसर जिले के एक किसान करम सिंह के यहां हुआ था। एक वर्ष उम्र में ही सोहन के पिता का देहांत हो गया। मुफलिसी के उस दौर में मां रानी कौर ने उनका पालन-पोषण किया। सोहन सिंह बेहद मेहनती, कभी हार न मानने वाले व कई भाषाओं के ज्ञाता थ्ो। बचपन से उन्हें धार्मिक शिक्षा दी गई।

बाल विवाह

उस समय देश में बाल विवाह जैसी प्रथाएं प्रचलित थीं। इस प्रथा का शिकार सोहन सिह को भी बनना पड़ा और उनकी दस वर्ष उम्र में ही बिशन कौर के साथ विवाह कर दिया गया। बिशन कौर लाहौर के एक जमींदार कुशल सिह की पुत्री थीं। सोहन सिह ने सोलह वर्ष की उम्र में अपनी स्कूली शिक्षा पूर्ण की। वे उर्दू और फारसी में दक्ष थे।


बुरी संगत का असर

कहा जाता है बुरी संगति का असर बुरा ही होता है। और यही हुआ सोहन सिंह के साथ। युवा होने पर सोहन सिह बुरे लोगों की संगत में पड़ गए। उन्होंने अपनी संपूर्ण पैतृक संपत्ति शराब पीने और अन्य कार्यों में गवां दी।
दरिद्रता के दिनों में उनके सभी साथियों ने साथ छोड़ दिया। विद्धानों का कहना है कि जब तक आपके पास धन है तब तक ही आप के दोस्त आपके साथ रहते हैं और धन समा’ होते ही वो भी आपका साथ छोड़ देते हैं। कुछ समय बाद सोहन का संपर्क बाबा केशवसिह से हुआ। उनसे मिलने के बाद ध्यान और योग के माध्यम से शराब व अन्य नश्ो की चीजों को पूरी तरह से छोड़ दिया।


जीविका की खोज

शुरू से ही स्वाभिमानी सोहन ने अपनी आजीविका की खोज में और देश के विकास में योगदान देने की प्रेरणा लिए सन् 19०7 में अमेरिका जा पहुंचे। उनके भारत छोड़ने से पहले ही लाला लाजपतराय व अन्य देशभक्त राष्ट्रीय आंदोलन आंरभ कर चुके थे। इसकी भनक सोहन के कानों तक भी पहुंच चुकी थी। वहां उन्हें एक मिल में काम मिल गया। लगभग 2०० पंजाब निवासी वहां पहले से ही काम कर रहे थे। कम वेतन और विदेशियों द्बारा अपमान किए जाने से तिलमिलाए सोहन सिंह ने बगावत कर दी। उस बगावत के बाद सोहन का नाम बाबा सोहन सिंह भकना पड़ गया।


क्रांतिकारी संस्था का निर्माण

उस समय देश को आजाद कराने के लिए देश के रणबांकुरों में आजादी की चिंगारी सुलग चुकी थी। उन्होंने 'पैसिफिक कोस्ट हिन्दी एसोसिएशन' की स्थापना की। बाबा सोहन सिह उसके अधयक्ष और लाला हरदयाल मंत्री बने।

अखबार का संचालन

उस समय देश में लोगों का जागरूक करने का कोई कारगर साधन उपलब्ध नहीं था। अंग्रेजों की काली करतूतों को उजागर करने के लिए 'गदर' नाम के अखबार का प्रकाशन और संपादन किया। गदर की सफलता के बाद 'ऐलाने जंग, 'नया जमाना, जैसे प्रकाशन भी किए गए। आगे चलकर संस्था का नाम भी '.गदर पार्टी' कर दिया गया। '.गदर पार्टी, के तहत बाबा सोहन सिह ने क्रांतिकारियों को एकत्र करने व हथियारों को भारत भेजने की योजना में बढ़-चढ़कर भाग लिया।


आजीवन कारावास

क्रांतिकारी गतिविधियों में जुड़े होने और प्रथम लाहौर षड़यंत्र में शामिल होने की वजह से 13 अक्टूबर, 1914 को कलकत्ता से उन्हें गिरफ्तार कर लाहौर जेल भ्ोज दिया गया।
बाबा सोहन सिह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई और उन्हें अंडमान की जेल भेज दिया गया। वहां से वे कोयंबटूर और भखदा जेल भेजे गए। उस समय यहां महात्मा गांधी भी बंद थे। फिर वे लाहौर जेल ले जाए गए। इस दौरान उन्होंने एक लंबे समय तक यातनापूर्ण जीवन व्यतीत किया।
और आज के ही दिन यानी 2० दिसंबर, 1968 को महान क्रांतिकारी बाबा सोहन सिह भकना का देहांत हो गया।




Sunday, 15 December 2013

सिंगापुर से शिक्षा

सिंगापुर से सीखें कला के रंग


विदेश में हायर एजूकेशन कंप्लीट करने का सपना लगभग हर टैलेंटेड स्टूडेंट का होता है, लेकिन ये सपने कुछ के ही पूरे हो पाते हैं, क्योंकि जानकारी के अभाव में वह सही टाइम पर अपने भविष्य को लेकर संजोए गए सपने को पूरा करने के लिए इंपार्टेंट डाक्यूमेंट और प्रासेस का फालो नहीं कर पाते, जिस कारण उनके सपनों का आधार भी कमजोर हो जाता है। अगर आपका सपना भी है फारेन में एजूकेशन कंप्लीट करने का तो इसके लिए कमर कस लीजिए। आइए जानते हैं कैसे पाए सिंगापुर में हायर एजूकेशन।
सिगापुर गवर्नमेंट यहां की एजूकेशन सिस्टम को 'ग्लोबल बनाने के लिए सभी जरूरी प्रयास कर रही है। सिगापुर सिर्फ बिजनेस के लिहाज से ही नहीं, बल्कि एजुकेशन के मामले में भी दुनिया की बेस्ट कंट्री में गिना जाने लगा है। इकोनामी के स्टàांग होने के साथ ही यहां की एजूकेशन क्वालिटी और स्टडी सिस्टम भी बेहद मजबूत है। यहां का एंवायरमेंट भी भारतीय छात्रों के लिए काफी फैमिलियर है। यही रीजन है कि यहां आने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।

मूल्यांकन

निवेश से पहले मूल्यांकन जरूरी

हर कार्य की शुरुआत करने से पहले जरूरी होता है सही तरीके से उसकी प्लानिंग करना और उसके बाद उसका मूल्यांकन करना। अगर आप घर खरीदने जा रहे हैं तो यह बेहद जरूरी हो जाता है। मकान खरीदने से पहले आवश्यक है कि आप कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर गौर फरमाएं। जैसे मकान की लोकेेशन सही जगह है या नहीं। सिक्योरिटी, लिफ्ट, इंडीविजुअल कमरों की लंबाई और चौड़ाई, पार्किंग और सबसे जरूरी आपका अपार्टमेंट लीगल है या नहीं, आदि का विश्ोष ख्याल रखना होता है।


Monday, 4 November 2013

अवाज के जादूगर


एक समय ऐसा समय था जब पूरे देश में रेडियो का चलन था। हमेशा से रेडियो का आम इंसान की जिदगी में एक अहम स्थान था, और सेलिब्रेटी भी रेडियो से बड़े शौक से जुड़ते थे। फिर वह समय भी आया जब टीवी और इंटरनेट ने अपनी-अपनी पहचान बना ली। घरों में रेडियो की जगह टेलीविजन ने ले ली और रेडियो की लोकप्रियता घटने लगी।

रोमांचकारी कार्य

हर क्ष्ोत्र में एक समय ऐसा आता है जिसमें उसके प्रति बदलाव का नया दौर चलता है और उसमें नई -नई चीजों का जुड़ाव व अलगाव होता है, ठीक बिल्कुल ऐसा ही हुआ रेडियो इंडस्ट्री में भी हुआ। एफएम रेडियो के आगमन के साथ ही रेडियो में भी क्रांति आई। एफएम रेडियो ने लोगों की बदलती पसंद को जाना और पुराने ढररे के संगीत को बदलकर नये संगीत को नये तरीके से लोगों के सामने पेश किया। एफएम रेडियो में रेडियो जॉकी ने अपनी अलग और प्रभावी पहचान बनाई।
एक आरजे को लाइव प्रोग्राम के दौरान श्रोताओं से उनकी रुचि के अनुरूप बातें करनी होती हैं और उनकी पसंद का गीत भी सुनाना होता है। इसके अलावा सेलिब्रेटी से इंटरव्यू, नए कॉन्टेस्ट और म्यूजिक इंफोर्मेशन जैसी चीजें भी आरजे के कार्यों में प्रमुखता से शामिल होती है।

संगीत के साथ संभावनाओं का सागर

देश में 1०० से भी ज्यादा प्राइवेट एफएम रेडियो स्टेशन मौजूद हैं जबकि आने वाले समय भारत सरकार ने 5० से भी ज्यादा नये एफएम स्टेशंस व कम्यूनिटी रेडियो को चालू करने की योजना बनाई है, जोकि इस क्ष्ोत्र में अपार संभावनाओं के दरवाजे खुलने को तैयार हैं। आज स्थिति यह है कि मल्टीनेशनल कंपनी, बड़ी इंडस्ट्री से लेकर छोटे उद्योग भी एफएम रेडियो को अपने प्रचार का मुख्य जरिया माने जा रहे हैं। एफएम रेडियो के क्षेत्र में यह केवल शुरुआत है और इसमें अपार संभावनाएं हैं। संगीत में रुचि रखने वालों के लिए आरजे बनने के रास्ते खुले हैं।

 

Thursday, 31 October 2013

फ्यूचर का इंश्योरंस

आज हर किसी को अपने ब्राइट फ्यूचर की चिंता सताती है। भविष्य में उनके पास पैसे रहेंगे या नहीं इस बात का डर लगभग हर व्यक्ति को होता है। इसलिए वहां जरूरत होती हैं इंश्योरेंस की। आज हर क्ष्ोत्र में हर किसी वस्तु का इश्योरेंस किया जा रहा है। क्योंकि हर व्यक्ति खुद को सिक्योर रखना चाहता है। इसी वजह से आज इंश्योरेंस का प्रोफेशन हर पल प्रगति कर रहा है। इस क्षेत्र में ट्रेंड प्रोफेशनल्स की बहुत मांग है।

 

Saturday, 26 October 2013

राइट योर ओन कैरियर


राईटिंग कई तरह की हो सकती है। यह क्रिएटिव या डायरेक्ट राइटिग भी हो सकती है। सच पूछिए, तो लिखने की कला हर किसी में नहीं होती है। और जिनमें लिखने की जिज्ञासा है या वे लिखने में हुनरमंद हैं, तो आज उनके लिए जॉब की कोई कमी भी नहीं है, क्योंकि आज कॉपी राइटिग, क्रिएटिव राइटिग, टेक्निकल राइटिग के क्षेत्र में लिखने में हुनरमंद लोगों की खूब डिमांड है।

 

Sunday, 13 October 2013

बापू हमारे आंखों के प्यारे

एक मोहन जो बना महात्मा


सत्याग्रह, अहिसा और सादगी को मूल मंत्र मानने वाले महात्मा गांधी जी का आज जन्म दिन है। उन्होने देश के लिए बलिदान दिया। उनके आदर्शों से प्रभावित होकर रबिद्रनाथ टैगोर ने पहली बार उन्हें महात्मा के नाम से संबोधित किया। गांधी जी ने अपना जीवन सत्य की व्यापक खोज में समर्पित कर दिया था। अपने इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए उन्होंने स्वयं अपनी गलतियों पर प्रयोग करना प्रांरभ किया। अपने अनुभवों को उन्होंने अपनी आत्मकथा 'माई एक्सपेरिमेंट्स विद ट्रुथ’ में संकलित किया था।

शुरूआती जीवन और शिक्षा

मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म 2 अक्तूबर सन 1869 को पोरबंदर (गुजरात) के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उनके पिता करमचंद गांधी पोरबंदर के दीवान थे। मोहनदास की मां पुतलीबाई का स्वभाव धार्मिक प्रवत्ति का था। गांधीजी की प्रारंभिक शिक्षा पोरबंदर में हुई। वह गणित विषय में बेहद कमजोर व शर्मील और एकांतप्रिय स्वाभाव के मगर गंभीर व्यक्ति त्व के पुरुष थ्ो।

नकल से घृणा

एक बार विद्यालय में घटी एक घटना ने यह संदेश अवश्य दे डाला कि निकट भविष्य में यह छात्र आगे जरूर जाएगा। घटना के अनुसार उस दिन स्कूल निरीक्षक विद्यालय में निरीक्षण के लिए आए हुए थे। कक्षा में उन्होंने छात्रों की 'स्पेलिग टेस्ट लेनी शुरू की। मोहनदास शब्द की स्पेलिग गलत लिख रहे थे, इसे कक्षाध्यापक ने संकेत से मोहनदास को कहा कि वह अपने पड़ोसी छात्र की स्लेट से नकल कर सही शब्द लिखें। उन्होंने नकल करने से इंकार कर दिया। क्योंकि वह को जीवन की प्रगति में बाधक मानते थ्ो।

पश्चाताप गलतियों की माफी है

वैसे तो मोहनदास आज्ञाकारी थे, पर उनकी दृष्टी में जो अनुचित था, उसे वे उचित नहीं मानते थे। बचपन में मोहनदास बुरी संगत के कारण अवगुणों में डूब गए। धूम्रपान और चोरी करने का भी अपराध किया। लेकिन बाद में गलती को स्वीकार करते हुए उन्होंने सारी बुरी आदतों से किनारा कर लिया। उनका मानना था कि अगर सुबह का भूला शाम को घर आ जाए तो उसे भूला नहीं कहते।

बाल विवाह प्रगति में अवरोध

तेरह वर्ष की आयु में मोहनदास का विवाह कस्तूरबा से कर दिया गया। उस उम्र के लड़के के लिए शादी का अर्थ नए वत्र, फेरे लेना और साथ में खेलने तक ही सीमित था। लेकिन जल्द ही उन पर काम का प्रभाव पड़ा। शायद इसी कारण उनके मन में बाल-विवाह के प्रति कठोर विचारों का जन्म हुआ। उन्होनें बाल-विवाह को भारत की एक भीषण बुराई मानते थे। उनका मानना था कि बचपन में ही विवाह किए जाने से जीवन के प्रगति का पथ अवरोधों से भर जाता है। बाल विवाह भारत में रोकना बेहद जरूरी है।

मेरी देह देश की और देश मेरी देह का

गांधीजी ने हमेशा दूसरों के लिए ही संघर्ष किया। मानो उनका जीवन देश और देशवासियों के लिए ही बना था । इसी देश और उसके नागरिकों के लिए उन्होंने अपना बलिदान दिया। वे स्वयं को सेवक और लोगों का मित्र मानते थे। यह महामानव कभी किसी धर्म विशेष से नहीं बंधा शायद इसीलिए हर धर्म के लोग उनका आदर करते थे ।
वे जीवनभर सत्य और अहिसा के मार्ग पर चलते रहे। उनका मानना था कि कोई व्यक्ति जन्म से महान नहीं होता। कर्म के आधार पर ही व्यक्ति महान बनता है। उन्होंने सत्य, प्रेम और अंहिसा के मार्ग पर चलकर यह संदेश दिया कि आदर्श जीवन ही व्यक्ति को महान बनाता है ।
मोहनदास से महात्मा और महात्मा से बापू बने उस शख्स ने यह सिद्ध कर दिखाया कि दृढ़ निश्चय, सच्ची लगन और अथक प्रयास से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।